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शनिवार, 18 जुलाई 2009

डा. रमन ने संजय द्विवेदी को दीं शुभकामनाएं



रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के नवनियुक्त विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। 10 जुलाई को सायं रायपुर स्थित मंत्रालय स्थित अपने कार्यालय में मुख्यमंत्री डा. सिंह ने संजय द्विवेदी का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि जिस तरह छत्तीसगढ़ राज्य में उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानदंडों को बनाए रखते हुए काम किया वैसे ही वे मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में भी यशस्वी होंगें। मुख्यमंत्री ने कहा श्री द्विवेदी छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता का एक जरूरी नाम हैं और उम्मीद है कि भोपाल में रहते हुए भी वे छत्तीसगढ़ राज्य की समस्याओं के साथ –साथ उसकी विशेषताओं और गौरव को भी रेखांकित करते रहेगें।

सोमवार, 26 मई 2008

0 डा. तिवारी पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से विभूषित



रायपुर। पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से विभूषित होने के बाद 'दस्तावेज के संपादक डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि संवेदना का विकास ही साहित्यिक पत्रकारिता का बुनियादी आदर्श है। भारतीय परंपरा का मूल स्वर सहिष्णुता है, जिसकी कमी के कारण समाज में अशांति का वातावरण बन रहा है।

महंत घासीदास स्मृति संग्रहालय सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में गोरखपुर से पिछले तीन दशकों से अनवरत निकल रही त्रैमासिक पत्रिका 'दस्तावेज के संपादक डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को प्रख्यात कवि-कहानीकार विनोद कुमार शुक्ल ने शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और ग्यारह हजार रुपए नगद देकर पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से विभूषित किया।

पूर्वज साहित्यकार पुरस्कार के लिए नहीं, दंड के लिए पत्रिकाएं निकालते थे - तिवारी
‘साहित्यिक पत्रकारिता की जगह’’ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता में सहिष्णुता को प्रोजेक्ट करने की जरूरत है। पूंजी की माया महाराक्षस की तरह मुंह फाड़े खड़ी है, जो आंत्यांतिक रूप से मनुष्य का अहित करने वाली है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज साहित्यकार पुरस्कार के लिए नहीं, दंड के लिए पत्रिकाएं निकालते थे। पत्रकारों का एक पैर पत्रिका के दफ्तर में रहता था, तो दूसरा पैर जेल में। पहले लोग खतरा उठाकर कहना, लिखना चाहते थे। उस युग में साहित्य और अनुशासन एक थे। पत्रकारिता में यदि आदर्श स्थापित करना है, तो हमें पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए। डा. तिवारी ने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का संघर्ष हमारे संपादकों, पत्रकारों को अपनी जमीन, मनुष्यता से दूर कर रहा है। ज्ञान का भंडार किसी को मुक्त नहीं कर सकता।

डा. तिवारी ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता में आजकल दो विमर्श चर्चित हैं, दलित विमर्श और स्त्री विमर्श। उन्होंने कहा कि ऐसा करके स्त्री और पुरूष को एक-दूसरे के खिलाफ आमने-सामने खड़ा कर दिया गया है। दूसरा क्या वैविध्यपूर्ण जटिल संरचना वाले समाज में दलित बिना सहयोग के अपना उध्दार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता दोनों के लक्ष्य समान हैं और संवेदना, सहिष्णुता से ही पत्रकारिता, साहित्य और साहित्यिक पत्रकारिता में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।

साहित्य और पत्रकारिता के बीच समन्वय की पहल- हिमांशु द्विवेदी
कार्यक्रम के अध्यक्ष हरिभूमि के प्रबंध संपादक हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि मौजूदा समय में जबकि पिता का सम्मान घर के भीतर नहीं बचा है, संजय द्विवेदी द्वारा अपने दादा के नाम पुरस्कार की परंपरा स्थापित करना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि संस्कारों से कटने के समय में इस सम्मान से साहित्य और पत्रकारिता के बीच समन्वय स्थापित होगा और नए रिश्तों के संतुलन बनेंगे।

साहित्यिक पत्रकारिता में डॉ. तिवारी का अमूल्य योगदान – विनोद कुमार शुक्ल
मुख्य अतिथि विनोद कुमार शुक्ल ने कहा कि ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता में अपने अवदान, तेवर के लिए 'दस्तावेज को पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान मिलने और इसके संपादक डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की उपस्थिति से यह सम्मान ही सम्मानित हुआ है। उन्होंने साहित्यिक पत्रकारिता में डा. तिवारी के योगदान को अमूल्य बताया।

दस्तावेज विचार है – अष्टभुजा शुक्ल
विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कवि अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि 'दस्तावेज पत्रिका हाड़-मांस का मनुष्य नहीं है, वह विचार है। हम सब जानते हैं कि विचार का वध संभव नहीं है। यही वजह है कि यह पत्रिका 'जीवेत् शरद: शतम् के साथ 'पश्येव शरद: शतम् के भाव को भी लेकर तीन दशकों में 117 अंक निकल चुकी है।

साहित्यिक पत्रकारिता की डगर कठिन - जोशी
विशिष्ट अतिथि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता की डगर काफी कठिन है। इस मुश्किल सफर पर तीस सालों से अनवरत चल रही 'दस्तावेज और इसके संपादक डा. तिवारी के योगदान की चर्चा बिना साहित्यिक पत्रकारिता की बात अधूरी है।

कार्यक्रम की शुरुआत में अपने स्वागत भाषण में हरिभूमि, रायपुर के स्थानीय संपादक संजय द्विवेदी ने कहा कि भले ही मेरे दादा और रचनाधर्मी स्वर्गीय पं. बृजलाल द्विवेदी की कर्मभूमि उत्तर प्रदेश है पर छत्तीसगढ़ उनकी याद के बहाने किसी बड़े कृतिकार के कृतित्व को रेखांकित करने की स्थायी भूमि होगी और आयोजक होने के नाते यह मेरे लिए गर्व का विषय भी होगा। उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ का यही सखाभाव आज की वैश्विक खतरों से जूझने की भी वैचारिकी हो सकता है। कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कथाकार जया जादवानी और जादूगर ओपी शर्मा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान के निर्णायक मंडल के सदस्य रमेश नैयर, सच्चिदानंद जोशी, गिरीश पंकज को समिति की संयोजक भूमिका द्विवेदी और संजय द्विवेदी ने स्मृति चिन्ह प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन राजकुमार सोनी ने तथा आभार प्रदर्शन कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के रीडर शाहिद अली ने किया।

इस मौके पर पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ के अध्यक्ष बबन प्रसाद मिश्र, छत्तीसगढ़ हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर, छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग के आयुक्त डा. सुशील त्रिवेदी, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय, छत्तीसगढ़ वेवरेज कार्पोरेशन के चैयरमेन सच्चिदानंद उपासने, साहित्य अकादमी के सदस्य गिरीश पंकज, वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार तिवारी, दैनिक भास्कर के संपादक,दिवाकर मुक्तिबोध, नई दुनिया के संपादक रवि भोई, मनोज त्रिवेदी, पद्मश्री महादेव प्रसाद पांडेय, हसन खान, डा. रामेंद्रनाथ मिश्र, डा. राजेंद्र मिश्र, जयप्रकाश मानस, डॉ. राजेन्द्र सोनी, डा. मन्नूलाल यदु, डा. रामकुमार बेहार, डा. विनोद शंकर शुक्ल, राहुल कुमार सिंह, राम पटवा, नंदकिशोर शुक्ल, राजेश जैन, रमेश अनुपम, डा. राजेंद्र दुबे, संजय शेखर, रामशंकर अग्निहोत्रि, पारितोष चक्रवर्ती राजेंद्र ओझा, डा. सुभद्रा राठौर, सनत चतुर्वेदी, आशुतोष मंडावी, भारती बंधु, डा. सुरेश, राजू यादव, डा. सुधीर शर्मा, जागेश्वर प्रसाद, केपी सक्सेना दूसरे, चेतन भारती, एसके त्रिवेदी, रामेश्वर वैष्णव, बसंतवीर उपाध्याय, गौतम पटेल सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार एवं आम नागरिक उपस्थित उपस्थित थे।

मंगलवार, 13 मई 2008

पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति सम्मान समारोह 25 को



0 साहित्यिक पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए अलंकृत होंगे डा. तिवारी

रायपुर। साहित्यिक पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'दस्तावेज’ (गोरखपुर) के संपादक डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किए जाएंगे। 25 मई, 2008 को शाम 6.00 बजे रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मृति संग्रहालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल होंगे तथा अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु द्विवेदी करेंगे। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद जोशी, कवि अष्टभुजा शुक्ल, कथाकार जया जादवानी समारोह के विशिष्ट अतिथि होंगे। इस अवसर पर सम्मानित संपादक डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी “साहित्यिक पत्रकारिता की जगह” विषय पर मुख्य व्याख्यान देंगे।


पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समिति की संयोजक भूमिका द्विवेदी ने बताया है कि वर्ष 2007 के सम्मान हेतु डा. तिवारी के नाम का चयन पाँच सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया, जिसमें सर्वश्री विश्वनाथ सचदेव, विजयदत्त श्रीधर, रमेश नैयर, सच्चिदानंद जोशी और गिरीश पंकज शामिल हैं। डा. तिवारी को यह सम्मान साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं और श्रेष्ठ संपादन के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदी की स्वस्थ साहित्यिक पत्रकारिता को समादृत करने के उद्देश्य से इस पुरस्कार की शुरुआत की गई है। इस राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत किसी साहित्यिक पत्रिका का श्रेष्ठ संपादन करने वाले संपादक को ग्यारह हजार रुपए नगद, शाल, श्रीफल, सम्मान पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर समारोहपूर्वक सम्मानित किया जाता है। गत वर्ष यह सम्मान 'वीणा (इंदौर) के संपादक रहे डा. श्याम सुंदर व्यास को दिया गया था। इस वर्ष सम्मान के लिए चयनित डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी गोरखपुर से प्रकाशित हो रही साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका 'दस्तावेज के संपादक हैं। यह पत्रिका रचना और आलोचना की विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से नियमित प्रकाशित हो रही है। इसके लगभग दो दर्जन विशेषांक प्रकाशित हुए हैं, जो ऐतिहासिक महत्व के हैं। 1940 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में जन्मे डा. तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। डा. तिवारी की प्रकाशित पुस्तकों की श्रृंखला में आलोचना की नौ पुस्तकें, 6 कविता संकलन, दो यात्रा संस्मरण, एक लेखक संस्मरण, एक साक्षात्कार संकलन तथा 147 विभिन्न पुस्तकों का संपादन शामिल है। साथ ही उनकी कई रचनाओं का विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, भारत मित्र संगठन मास्को द्वारा पुस्किन सम्मान मिल चुका है। उनके द्वारा संपादित पत्रिका 'दस्तावेज को सरस्वती सम्मान भी मिल चुका है।