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सोमवार, 16 दिसंबर 2024

वर्ष 2025 : मीडिया इंडस्ट्री के लिए अनंत संभावनाओं का दौर

 - प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी


वर्तमान युग में मीडिया इंडस्ट्री तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। तकनीकी प्रगति और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव के चलते, मीडिया और मनोरंजन के पारंपरिक स्वरूप में काफी परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2024 ने इस बदलाव को और गति दी है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के कारण। वर्ष 2025 की ओर देखते हुए, यह स्पष्ट है कि एआई, डिजिटल मीडिया और नई तकनीकों का प्रभाव मीडिया इंडस्ट्री की दिशा को और अधिक प्रभावित करेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के योगदान से मीडिया में क्रांति

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) ने मीडिया इंडस्ट्री में न केवल कार्यप्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। एआई के माध्यम से सामग्री निर्माण, उपभोक्ता डेटा का विश्लेषण और दर्शकों की पसंद का सटीक अनुमान लगाना अब आसान हो गया है। उदाहरणस्वरूप:

· सामग्री निर्माण और संपादन: एआई-संचालित उपकरण जैसे GPT मॉडल्स, डीपफेक टेक्नोलॉजी और इमेज जनरेशन प्लेटफॉर्म कंटेंट क्रिएटर्स के लिए समय और लागत बचाते हैं। न्यूज़ चैनल्स अब रियल-टाइम न्यूज़ अपडेट्स और अनुकूलित समाचार प्रस्तुति के लिए एआई-सक्षम वर्चुअल एंकर का उपयोग कर रहे हैं।

· डिजिटल विज्ञापन: एआई एल्गोरिदम उपभोक्ताओं की सर्च और ब्राउज़िंग आदतों का विश्लेषण करके व्यक्तिगत विज्ञापन तैयार करते हैं। इससे न केवल विज्ञापनदाता, बल्कि उपभोक्ता भी लाभान्वित होते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी पसंद का ही कंटेंट देखने को मिलता है।

· ऑडियंस इंगेजमेंट: चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट दर्शकों के सवालों का जवाब देकर और उनकी पसंद के कंटेंट का सुझाव देकर मीडिया कंपनियों की पहुंच और प्रभाव को बढ़ा रहे हैं।

एआई से जुड़ी चुनौतियाँ

हालांकि एआई ने मीडिया इंडस्ट्री में असंख्य अवसर प्रदान किए हैं, लेकिन यह नई चुनौतियाँ भी लेकर आया है।

· नैतिकता और पारदर्शिता: एआई आधारित फेक न्यूज़ और डीपफेक टेक्नोलॉजी की वजह से गलत सूचनाओं का प्रसार बढ़ सकता है।

· मानव संसाधन का विस्थापन: पारंपरिक कार्यबल को एआई द्वारा रिप्लेस किए जाने का खतरा बना हुआ है।

· डेटा गोपनीयता: एआई को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है।

भारत और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का बाजार

भारत, विश्व में एआई के विकास और उपयोग के मामले में अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है। वर्ष 2024 में भारत का एआई बाजार लगभग $7 बिलियन तक पहुँच चुका है। अनुमान है कि 2025 तक यह $12 बिलियन तक बढ़ जाएगा। भारतीय एआई क्षेत्र में वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 20-25% के आसपास है।

वर्ष 2024 में, भारत में एआई के क्षेत्र में लगभग 4 लाख पेशेवर काम कर रहे हैं। सरकार और निजी कंपनियाँ मिलकर एआई स्टार्टअप्स और अनुसंधान में भारी निवेश कर रही हैं। 2025 तक, एआई आधारित नौकरियों की संख्या में 30% तक वृद्धि की उम्मीद है।

भारतीय मीडिया कंपनियाँ एआई-संचालित ट्रेंड एनालिसिस, कंटेंट पर्सनलाइजेशन और विज्ञापन ऑप्टिमाइज़ेशन पर भारी ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर रिलायंस जियो और टाटा जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स मीडिया और एआई के समागम के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रहे हैं।

भारत में डिजिटल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

भारत में डिजिटल मीडिया का प्रभाव पारंपरिक मीडिया की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में, भारत में लगभग 700 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से अधिकांश स्मार्टफोन के माध्यम से डिजिटल सामग्री का उपभोग कर रहे हैं।

नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, डिज़्नी+ हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स भारत में मनोरंजन का नया केंद्र बन गए हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, और यूट्यूब पर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री का उपभोग बढ़ रहा है। डिजिटल न्यूज़ पोर्टल्स जैसे इनशॉर्ट्स और स्क्रॉल ने पारंपरिक न्यूज़ चैनल्स की जगह लेनी शुरू कर दी है।

वर्ष 2024 में, भारत में डिजिटल विज्ञापन का आकार लगभग $4.5 बिलियन था। 2025 तक, यह $6.8 बिलियन तक पहुँचने की संभावना है। डिजिटल मीडिया में पर्सनलाइज्ड विज्ञापन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग एक नया ट्रेंड बन चुका है। भारत में 70% इंटरनेट उपयोगकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। सरकार की डिजिटल इंडिया पहल और सस्ती डेटा सेवाओं के कारण ग्रामीण भारत में डिजिटल कंटेंट का उपभोग तेजी से बढ़ रहा है।

2025 की उम्मीदें: मीडिया इंडस्ट्री का भविष्य

·  तकनीकी प्रगति का तेज़ी से उपयोग: वर्ष 2025 में एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग से मीडिया इंडस्ट्री में और अधिक नवाचार की उम्मीद है। दर्शक लाइव पोल्स, क्विज़ और अन्य इंटरैक्टिव माध्यमों के ज़रिए कंटेंट के साथ जुड़ेंगे। वर्चुअल रियलिटी और ऑग्मेंटेड रियलिटी  आधारित कंटेंट मीडिया इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

· स्थानीय और क्षेत्रीय कंटेंट का विस्तार: स्थानीय भाषाओं में कंटेंट की माँग बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय मीडिया कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे। 2025 तक, 60% से अधिक डिजिटल कंटेंट स्थानीय भाषाओं में होगा।

· नियामक और नैतिकता पर ज़ोर: एआई और डिजिटल मीडिया के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए सरकार डेटा सुरक्षा और फेक न्यूज़ की रोकथाम के लिए सख्त नियम लागू कर सकती है। "मीडिया ट्रांसपेरेंसी" के लिए नए मानक स्थापित होंगे।

· उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण: मीडिया इंडस्ट्री उपभोक्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए व्यक्तिगत और अनुकूलित सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर फ्री-टू-व्यू और पे-पर-व्यू जैसे मॉडल और प्रचलित होंगे।

कुल मिलाकर वर्ष 2024 का वर्ष भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के लिए नवाचार और चुनौतियों का संगम रहा है। एआई और डिजिटल मीडिया ने पारंपरिक मीडिया के स्वरूप को बदलते हुए उपभोक्ताओं की नई पीढ़ी की जरूरतों को पूरा किया है। वर्ष 2025 में, तकनीकी प्रगति और क्षेत्रीय कंटेंट के विस्तार के साथ, भारतीय मीडिया इंडस्ट्री विश्व स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करेगी। हालांकि, नैतिकता, डेटा सुरक्षा, और फेक न्यूज़ जैसे मुद्दों से निपटना महत्वपूर्ण होगा। अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्ष मीडिया इंडस्ट्री के लिए अनंत संभावनाओं का दौर होगा।

गुरुवार, 26 नवंबर 2020

दिमाग से नहीं, दिल से कहानी सुनाएं : सुभाष घई

 



आईआईएमसी के सत्रारंभ समारोह का मंगलवार को दूसरा दिन

नई दिल्ली, 24 नवंबर 'सिनेमा हो या मीडिया, आप कहानी दिमाग से नहीं, दिल से सुनाएं। और जब आप दिल से कहानी सुनाएंगे, तभी आप एक अच्छे कम्युनिकेटर बन पाएंगे।' यह विचार प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक श्री सुभाष घई ने मंगलवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के सत्रारंभ समारोह-2020 के दूसरे दिन व्यक्त किये।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए श्री घई ने कहा कि लगभग 3500 साल पहले वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत लिखे गए। उस समय में बड़े-बड़े कवि और लेखक भी हुए। उन्होंने अपने जीवन से जो सीखा, वो कविता, नाटक और मंत्रों के द्वारा लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने भाषण नहीं लिखे, बल्कि लोगों को समझ में आने वाला कंटेटलिखा। नाटक के साथ संगीत आया और वहां से ड्रामा और साहित्य पैदा हुआ। जिसने पूरी दुनिया को एक नई दिशा दिखाई। और ये सब दिमाग से नहीं, बल्कि दिल से लिखा गया।

श्री घई ने कहा कि मैं रोज सुबह जब उठता हूं, तो कुछ सीखने के लिए उठता हूं और आज भी मैं बच्चों से कुछ सीखने आया हूं। सीखने का ये जज्बा हर विद्यार्थी के अंदर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया सिर्फ अपने में व्यस्त है। अगर 'मास कम्युनिकेशन' के विद्यार्थी भी स्वयं में व्यस्त रहेंगे, तो वे 'मास' को कैसे समझ पाएंगे। सिनेमा भी मास मीडिया है, क्योंकि हम फिल्में अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए बनाते हैं। इसलिए हमारी नजर में समाज पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

निष्पक्ष पत्रकारिता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जैसे दुकानदार बनने के लिए ग्राहक को पहचानना पड़ता है, उसी तरह पत्रकार को भी खबर लिखने से पहले समाज को पहचानना चाहिये। दूसरों को पहचानने के लिए स्वयं को पहचानना बेहद आवश्यक है। और इसके लिए आपको खुद का शिक्षक बनना पड़ेगा। जब आप स्वयं के शिक्षक बनते हैं, तब आप अपने प्लस और माइनस पाइंट दोनों जानते हैं। श्री घई ने बताया कि अगर आपको सम्मान पाना है, तो दूसरों का सम्मान करना होगा। आपको अपने पेरेंट्स को एक दोस्त की तरह समझना होगा। इसलिए दूसरों का दिमाग नहीं, बल्कि दिल जीतना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इससे पहले कार्यक्रम के प्रथम सत्र में 'भारतीय मीडिया में संपादकीय स्वतंत्रता' विषय पर बोलते हुए हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक श्री सुकुमार रंगनाथन ने कहा कि हमें पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, तभी हम अच्छी पत्रकारिता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी पत्रकारिता ढेर सारी मेहनत भी साथ लेकर आती है, इसलिए विद्यार्थियों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। 

वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश उपाध्याय ने कहा कि भारत में संविधान के द्वारा जो स्वतंत्रता मीडिया को दी गई थी, वो आज भी मौजूद है। लेकिन आज ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि संपादकीय स्वतंत्रता कम हो गई है। उन्होंने कहा कि 'एडिटोरियल फ्रीडम' असल में 'मैन वर्सेज मशीन' का इश्यू है। आज मशीनें ये तय कर रही हैं कि क्या और कैसे देखना है। इसलिए समाज को इस विषय पर संवेदनशील होना होगा।

इस अवसर पर ऑर्गेनाइजर के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि प्रत्येक मीडिया संस्थान की अपनी एक संपादकीय पॉलिसी होती है और उसी के हिसाब से संपादकीय स्वतंत्रता तय होती है। इसलिए ये दोष देना गलत है कि सरकार संपादकीय स्वतंत्रता में दखल दे रही है।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में 'भारत में कृषि क्षेत्र की संभावनाएं और चुनौतियां' विषय पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा एवं सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज, चेन्नई के निदेशक डॉ. जे.के. बजाज ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

समारोह के तीसरे दिन बुधवार को हांगकांग बैपटिस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दया थुस्सु, अमेरिका की हार्टफर्ड यूनिसर्विटी के प्रोफेसर संदीप मुप्पिदी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एसोसिएट डीन प्रोफेसर सिद्धार्थ शेखर सिंह एवं उद्यमी आदित्य झा विद्यार्थियों से रूबरू होंगे।