रविवार, 17 जून 2012

जनजाति समाज और जनसंचार माध्यम पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 18से


देश भर से जुटेंगें आदिवासी चिंतक, विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता
भोपाल,17 जून। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से 18 जून से तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। 18 से 20 जून तक भोपाल स्थित रवींद्र भवन में चलने वाली इस संगोष्ठी का विषय है –“जनजाति समाज एवं जनसंचार माध्यमः प्रतिमा और वास्तविकताकार्यक्रम पत्रकारिता विश्वविद्यालय के अलावा वन्या, आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान, वन साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित है।संगोष्ठी का शुभारंभ 18 जून को प्रातः 10.30 बजे मप्र के विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी करेंगें। इस सत्र के मुख्यवक्ता वनसाहित्य अकादमी के संरक्षक जगदेवराम उरांव होंगें तता विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह, बिहार के अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बाबूलाल टुडु और आदिम जाति शोध संस्थान, भोपाल के निदेशक के. सुरेश उपस्थित होंगें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला ने बताया कि लगभग 10 करोड़ जनसंख्या वाला जनजातीय समाज भारत में स्वतंत्रता से पूर्व से उपेक्षित रहा है। परन्तु पिछले 65 वर्षों में भी इस समाज को मुख्य धारा से समरस करने में सफलता प्राप्त नहीं हुई है। इस सम्मेलन में जनजातीय समाज की समस्याओं और समाधान पर मीडिया की भूमिका पर विस्तृत चर्चा होगी।कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला के मुताबिक लगभग 22 प्रान्तों से 35 से अधिक जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व इस संगोष्ठी में होगा। तीन दिवसीय संगोष्ठी में 10 चर्चा सत्र होंगे, जिसमें जनजाति समाज की विशेषताओं और समस्याओं पर 90 के लगभग शोध-पत्र प्रस्तुत होंगे। सम्मेलन का केन्द्र बिन्दु जनजाति समाज को भारत के विकास में सक्रिय सहभागी बनाना रहेगा। संगोष्ठी में जनजातीय समाज की भाषाओं व बोलियों की समानताओं और विभिन्नताओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ-साथ देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति समाज ने समय-समय पर जो संघर्ष किये उन पर भी प्रकाश डाला जायेगा। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में जनजाति समाज के पर्व, त्योहारों, जीवन शैली, रीति-रिवाजों, परम्पराओं, जीवन-दर्शन व आस्थाओं पर संवाद आयोजित होगा। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक खोज सामने लाई है कि पूरे भारत का जीनोटाइप 99 प्रतिशत समान है इसमें जनजाति समाज की जीनोटाइप की स्थितियों पर भी शोध-पत्र प्रस्तुत होंगे।  प्रो. कुठियाला ने कहा कि आज आवश्यकता यह है कि मीडिया जनजातीय समाज के विभिन्न विषयों को लेकर अभियान के रूप में एक संवाद बनाये जिसमें जनजातीय समाज का स्वर मुख्य रूप से उभरकर आये जिससे कि शेष समाज की समझ बने कि जनजातीय समाज की अपेक्षाएं और समस्याएं क्या हैं। इस संवाद की निरंतरता अगर बनी रहेगी तो देश की बड़ी जनसंख्या को जनजातीय समाज से समरस करने में सफलता प्राप्त होगी।  संगोष्ठी के समापन समारोह में बिहार के पूर्व राज्यपाल व न्यायमूर्ति विष्णु सदाशिव कोकजे अध्यक्षता करेंगे व लक्ष्मीकांत शर्मा, मंत्री, उच्च शिक्षा व जनसम्पर्क, मध्यप्रदेश शासन मुख्य अतिथि रहेंगे। समापन में मुख्य वक्तव्य जुएल उराव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनुसूचित जनजाति देंगे। इस समारोह में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलीप सिंह भूरिया एवं मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल भी विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। संगोष्ठी के संयोजक विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव प्रो. रामदेव भारद्वाज हैं।

1 टिप्पणी:

  1. छत्‍तीसगढ़ की एक खास जनजाति? ''सबरिया'' पर आज ही एक शोधपरक लेख देखा.

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