सोमवार, 19 जून 2017

योग से जुड़ रही है दुनिया

-संजय द्विवेदी

  भारतीय ज्ञान परंपरा में योग एक अद्भुत अनुभव है। योग भारतीय ज्ञान का एक ऐसा वरदान है, जिससे मनुष्य की चेतना को वैश्विक चेतना से जुड़ने का अवसर मिलता है। वह स्वयं को जानता है और अपने परिवेश के साथ एकाकार होता है। विश्व योग दिवस, 21 जून के बहाने भारत को विश्व से जुड़ने और अपनी एक पहचान का मौका मिला है। दुनिया के तमाम देश जब योग के बहाने भारत के साथ जुड़ते हैं तो उन्हें भारतबोध होता है, वे एक ऐसी संस्कृति के प्रति आकर्षित होते हैं जो वैश्विक शांति और सद्भाव की प्रचारक है।
   योग दरअसल भारत की शान है, योग करते हुए  हम सिर्फ स्वास्थ्य का विचार नहीं करते बल्कि मन का भी विचार करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व योग दिवस को मान्यता देकर भारत के एक अद्भुत ज्ञान का लोकव्यापीकरण और अंतराष्ट्रीयकरण करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके लिए 21 जून का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इस दिन सबसे बड़ा दिन होता है। योग  कोई धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं है यह मन और जीवन को स्वस्थ रखने का विज्ञान है। यह पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति है जिससे व्यक्ति की जीवंतता बनी रहती है। भारत सरकार के प्रयासों के चलते योग अब एक जनांदोलन बन गया है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री और आयुष मंत्रालय को इसका श्रेय देना चाहिए कि उन्होंने निजी प्रयासों से आगे आकर इसे शासकीय तौर पर स्वीकृति दिलाने का काम किया। यह बहुत सुंदर बात है कि देश में योग ने एक चेतना पैदा की है और वैश्विक स्तर पर भारत को स्थापित करने का काम किया है।
भारत बना योगगुरूः योग को अंतराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बाद पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। भारत के योगशिक्षकों की पूरी दुनिया में मान्यता बढ़ी है। भारतीय मूल के योगशिक्षकों या भारत में प्रशिक्षित योग शिक्षकों को लोग अधिक भरोसे से देखते हैं। इस बहाने भारत के योगाचार्यों को एक विस्तृत आकाश मिला है और वे अपनी प्रतिभा से वैश्विक स्तर पर अपना स्थान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री की रूचि के नाते भारत के दूतावास और विदेश मंत्रालय भी अपने स्तर पर इस गतिविधि को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पाठ्यक्रमों में स्थान मिलने के बाद योग की अकादमिक उपस्थिति भी बन रही है। योगिक स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषय आज हमारे समाज में सम्मान से देखे जा रहे हैं। दुनिया को अच्छे-योग्य-चरित्रवान योग शिक्षक उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। यह दायित्वबोध हमें काम के अवसर तो देगा ही भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर स्थापित करेगा। गत वर्ष वैश्विक योग दिवस पर दुनिया भर के देशों में योग के आयोजन हुए। जिनमें तमाम मुस्लिम देश भी शामिल थे। दुबई के बुर्ज खलीफा में स्वयं योगगुरू बाबा रामदेव ने 10 हजार महिलाओं को योग करवाया। इस अवसर उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि योग का कोई पंथ नहीं है यह 100 प्रतिशत पंथनिरपेक्ष अभ्यास है। उनका कहना था कि यह जीवन पद्धति है।
मन की बात में पहल की सराहनाः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून,2015 को आकाशवाणी पर 'मन की बात' कार्यक्रम के तहत देशवासियों को संबोधित करते हुए अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की चर्चा की थी। तब उन्‍होंने कहा कि लाखों लोगों ने यादगार चित्र भेजे और उसे मैंने रीट्वीट भी किए। योग दिवस मेरे मन को आंदोलित कर गया। प्रधानमंत्री मोदी का कहना था कि पूरी दुनिया ने योग को अपनाया। यह भारत के लिए गर्व की बात है। उन्‍होंने कहा कि योगाभ्‍यास का सूरज दुनिया में कहीं नहीं ढलता। योग ने पूरी दुनिया को जोड़ा। फ्रांस व अमेरिका से लेकर अफ्रीकी व मध्‍यपूर्व के देशों में योग करते लोगों को देखना अविस्‍मरणीय क्षण था। उन्‍होंने टाइम्‍स स्‍क्‍वायर से लेकर सियाचिन और दक्षिण चीन सागर में सैनिकों द्वारा योगाभ्‍यास कार्यक्रम में शामिल होने की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि कहा कि आइटी प्रोफेशनल्‍स योग शिक्षकों का एक डाटाबेस तैयार करें। हम इनका उपयोग दुनिया भर में कर सकते हैं।
विश्वशांति और योग की उपयोगिताः
दुनिया में मनुष्य आज बहुत अशांत है। उसके मन में शांति नहीं है। इसलिए सर्वत्र हिंसा, आतंकवाद और अशांति का वातावरण है। ऐसे कठिन समय में योग का अनुगमन और अभ्यास विश्वशांति का कारण बन सकता है। मनुष्य का अगर अपने मन पर नियंत्रण हो। उसे चेतना के तल पर शांति अनुभव हो दुनिया में हो रहे तमाम टकराव टाले जा सकते हैं। वैसे भी कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन- मस्तिष्क निवास करता है। योग जहां आपके तन को शक्ति देता है वहीं जब आप प्राणायाम की ओर बढ़ते हैं तो वह आपके मन का भी समाधान करता है। मन की शांति के लिए आपको जंगलों में जाने की जरूरत नहीं है। योग आपको आपके आवास पर ही अद्भुत शांति का अनुभव देता है।
   एकाग्र मन और संतुलित सांसें दरअसल बहुत कुछ साध लेती हैं। योग दिवस के बहाने यह अवसर एक उत्सव में बदल गया है। योग दिवस के मौके पर हर साल कुछ रिकार्ड बन रहे हैं। गत वर्ष  1 लाख से ज्यादा लोगों ने योग कर तोड़ा रिकॉर्ड। फरीदाबाद में बाबा रामदेव के कार्यक्रम में 1 लाख से ज्यादा लोगों ने एक साथ योग करके गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है। इसकी घोषणा कार्यक्रम में मंच से डॉ. मनीष बिश्नोई ने की। वहीं पतंजलि के 408 लोगों ने एक साथ 5 सेकेंड शीर्षासन कर पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड सिटीजन लैंड के नाम था जहां 265 लोगों ने एक साथ 5 सेकेंड तक शीर्षासन किया था। इस प्रकार की घटनाएं बताती हैं  कि योग को लेकर देश में उत्साह का वातावरण है। हर आयु वर्ग के लोग अब इस गतिविधि में हिस्सा ले रहे हैं। देश के संत समाज और योगियों ने इस अद्भुत ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सार्थक प्रयत्न किए हैं। इसके लोकव्यापीकरण में बाबा रामदेव सबसे चमकदार नाम हैं किंतु उनके अलावा भी विधिध धाराओं से जुड़े संत और धर्मगुरू भी इस विद्या को प्रचारित और प्रोत्साहित करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इसी तरह देश भर के सामाजिक संगठन,विद्यालय और राज्य सरकारें भी इस गतिविधि को प्रोत्साहित कर रही हैं। समाज की समवेत अभिरूचि से यह अभियान एक आंदोलन में बदल गया है इसमें दो राय नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि तन-मन और आत्मा को साधने वाला, बदलने वाला, स्वस्थ रखने वाला यह अभियान जनअभियान बने। गांव-गांव तक फैलै और स्वस्थ-सुंदर भारत वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका में दिखे।



1 टिप्पणी:

  1. Really all credit goes to our visionary prime minister . Who reexplore our ancient yoga based on science. Now most of the nation is part of this initiative. No dought atleast our pm gave us to full of potential to do any thing if u want. As Your article make me strong to do something nd to write various topic..thanks lot sir

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